बारे में
प्रभाष जोशी का जन्म मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के अस्टा गांव में 15 जुलाई 1935 को हुआ था। 12 भाई बहनों में वह सबसे बड़े बेटे थे। घर में उनसे तीन बड़ी बहनें थीं। उनकी प्राइमरी शिक्षा महाराजा शिवाजी राव प्राइमरी और मिडिल स्कूल में हुई। 1951-52 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ दिनों तक सुनवानी महाकाल के प्राइमरी स्कूल में मास्टरी की। इंदौर में विनोबा जी के आने पर उन्होंने नई दुनिया के संपादक राहुल बारपुते के कहने पर पत्रकारिता में कदम रखा। यहां 1960 से करीब छह साल तक काम करते रहे। इसके बाद 1965 में इंग्लैंड जाकर मैनचेसटर गार्जियन और टेलीग्राफ में कुछ माह तक काम किया। वापस लौटने पर ‘मध्यदेश’ नामक अखबार से जुड़े 1968 में गांधी शताब्दी समिति में प्रकाशन सचिव होकर दिल्ली आ गए। यहां 1970 से 74 तक सर्वोदय निकाला। इसके बाद प्रजानीति अखबार से बतौर संपादक जुड़े ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में 1981-83 तक स्थानीय संपादक रहे। इसी दौरान उन्होंने जनसत्ता अखबार निकालने की योजना तैयार की। जनसत्ता शुरू होने पर दिल्ली में उसके प्रधान संपादक बने।
1992 से उन्होंने जनसत्ता में लोकप्रिय कालम ‘कागद कारे’ लिखना शुरू किया। उनकी अब तक 9 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘हिंदू होने का धर्म’, ‘मसि कागद’, ‘कागद कारे’ आदि प्रमुख हैं। वह फिलहाल हिंसा दान के ऊपर अपनी किताब ‘अटका कहां स्वराज’ लिख रहे थे। उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि 2012 तक अपने कालम ‘कागद कारे’ के बीस साल पूरे होने पर उसे लिखना बंद कर 75 की उम्र तक सब काम निपटा देंगे। इसके बाद नहीं लिखेंगे। उन्हें शलाका सम्मान, लोहिया विशिष्ट सम्मान जैसे कई सम्मान मिले थे।