राजेंद्र यादव (वरिष्ठ साहित्यकार)
हिदी पत्रकारिता के दिग्गज पुरुष थे प्रभाष जोशी। वे एक इंटेलेक्चुअल सार्वजनिक शख्सियत थे आज की पूरी हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में एक-दो सार्वजनिक शख्सियतों में यदि एक नाम प्रभाष जी का लूं तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्रिकेट के तो वे दीवाने थे और सचिन तेंदुलकर के जबर्दस्त प्रशंसक। आस्टेलिया के साथ पांचवें वन डे मैच में हार ने ही शायद उनकी जान ली।
जहां तक उनकी विचारधारा का सवाल है, वे एक सेकुलर इंसान थे और समाजवादी थे। सांप्रदायिकता के खिलाफ हाल के वर्षों में उन्होंने जमकर लिखा। यहां मैं उनकी किताब ‘हिंदू होने का अर्थ’ का जरूर जिक्र करना चाहूंगा। इस किताब में उन्होंने हिंदू धर्म को अपने ढंग से परिभाषित किया है।
सभी जानते हैं कि राजनीति में समाजवादियों की यात्रा बड़ी उपर-नीचे वाली रही है। इस मामले में प्रभाष जी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सांप्रदायिक नीतियों का लगातार विरोध किया जबकि बहुत से समाजवादी नेता भाजपा के साथ खड़े थे।
कुल मिलाकर अज्ञेय और राजेंद्र माथुर के बाद मैं उन्हें हिंदी का तीसरा सबसे बड़ा पत्रकार मानता हूं। यह भी सच है कि ‘जनसता’ अखबार के जरिए उन्हें खुद को साबित करने का लंबा वक्त मिला वे लगातार लिखते रहे और अंतिम क्षणों तक सक्रिय रहे।